बॉलीवुड की मूवीज में दिखाए जा रहे कंटेंट की ध्यान में रखते हुए सेंसर बोर्ड मूवीज को एडल्ट, सेमि-एडल्ट और नॉर्मल मूवीज का सर्टिफिकेट देता है। सेंसर बोर्ड से प्रमाडित फिल्मो के सेट अक्सर भव्य होते है। अच्छे मूवी सेट और महंगी स्टार कास्ट मूवीज को A-ग्रेड की मूवीज कहा जाता है।ऐसी मूवीज की सूटिंग क्लिप्स आप अक्सर सोशल मीडिया पर देखते भी होंगे। इसके अलावा हमारी फिल्म इंडस्ट्रीज में B-ग्रेड की फिल्मो का भी बहुत चलन है। ऐसी फिल्मे सिर्फ और सिर्फ अश्लील सीन्स की वजह से ही देखि जाती है। इस तरह की मूवीज अक्सर सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट के बिना ही रिलीज़ की जाती है। किस तरह से बनती है ये मूवीज आज हम आपको बताने जा रहे है:

इस तरह की मूवीज के सेट अक्सर छोटे होते है

A-ग्रेड की मूवीज के विपरीत इस तरह की मूवीज के चोट अक्सर छोटे होते है। बहुत कम लोग ही इस तरह के मूवीज के सेट पर मौजूत होते है। सेट पर सिर्फ डायरेक्टर, कैमरामैन, एक्टर, एक्ट्रेस और कुछ सपोर्ट स्टाफ ही मौजूत होता है। शूटिंग देखने वाले लोगो को यहाँ आने की मनाही ही होती है। ऐसा इसलिए होता है ताकि एक्ट्रेस को अश्लील सीन देने में कोई परेशानी न हो।

नहीं होती कोई रिहर्सल

क्योकि के मूवीज मुख्यतः अपने बोल्ड सीन्स की वजह से देखि जाती है इसलिए प्रोडक्शन कोस्ट का ज्यादातर हिस्सा इन्ही सीन्स पर खर्च किया जाता है। अधिकतर सीन्स की रिहर्सल भी नहीं की जाती। हॉट सीन्स को झोड़कर सारे सीन्स एक ही शॉट में रिकॉर्ड कर लिए जाते है।

एक्ट्रेस पर होता हिअहै ज्यादा फोकस

क्योकि इस तरह की फिल्मो के देखने वालो में बड़ा हिस्सा सिर्फ युवको का होता है इसलिए इस तरह की मूवीज की एक्ट्रेस पर ज्यादा फोकस किया जाता है। एक्टर की अपेक्षा एक्ट्रेस को ज्यादा पैसे भी मिलते है। एक्ट्रेस के कपड़ो पर भी बड़ी राशि खर्च होती है।

इस वीडियो में देखिये की किश तरह होता है इस तरह की मूवीज का निर्देशन